उरी में कायराना आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के मध्य युद्ध के आसार बढ़ गए हैं. हालाँकि युद्ध की विभीषिका भारत के लिए ज्यादा नुकसानदायक है क्योंकि भूखा-नंगा पाकिस्तान नहायेगा क्या और निचोडेगा क्या ?

पाकिस्तान को तबाह करने की सुगबुगाहट तेज़ , पिछले बहतर घंटों में मिली है यह कामयाबी

जैश-ए-मोहम्मद के कायराना फिदायीन हमले ने भारत के १८ वीर जवानों की जान ले ली है . सबसे दुखद बात यह है कि यह कायराना हमला तब किया गया जब जवान सो रहे थे और अधिकांश जवान ग्रेनेड हमले के कारण लगी आग में जल कर वीरगति को प्राप्त हुए.  उरी में हुए इस कायराना आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के मध्य युद्ध के आसार बढ़ गए हैं. इस बार भारत का सामान्य जनमानस भी हिंसा की भाषा में ही पाकिस्तान से निपटने की सलाह दे रहा.  पिछले सरकारों की बिरयानी नीति कहीं डोजियर नीति तक सीमित न रह जाए,  इसलिए पठानकोट हमले के बाद उठाये गए क़दमों  को पुनः विकल्प नहीं माना जा सकता.  इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि युद्ध कि विभीषिका भारत के लिए ज्यादा नुकसानदायक है क्योंकि भूखा-नंगा पाकिस्तान नहायेगा क्या और निचोडेगा क्या ? गौरतलब है कि  ट्विटर पर अपनी सक्रियता के लिए जाने जाने वाले नरेन्द्र मोदी ने अपने "दोषियों को बख्सा नहीं जाएगा" वाली ट्वीट के बाद, पिछले तीन दिनों में कोई भी अन्य ट्वीट नहीं किया है. यह उनके मनोदशा को बताने के लिए पर्य्पात है कि, उक्त घटना के शोक से वह उबर नहीं पाएं हैं. 

क्या हमें पाकिस्तान के साथ जंग करनी चाहिए? ऐसा नहीं कर पाने की तीन बड़ी वजह है. 

१. हम दोनों ही परमाणु ताकत संपन्न देश हैं. पाकिस्तान पहले ही, पहले परमाणु हथियारों का इस्तेमाल न करने की शर्त से इंकार कर चुका है. क्या भारत ऐसा जोखिम लेने की पहल कर सकता है, जिसके परमाणु युद्ध में तब्दील होने की आशंका है?

 २. पाकिस्तान की लाख कोशिशों के बावजूद दुनिया फिलहाल कश्मीर मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रही है. इस्लामाबाद इस मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने को बेताब है. फिलहाल, विश्व समुदाय हमारे पक्ष में है. युद्ध शुरू होते ही हालात नाटकीय ढंग से बदल जाएंगे और कश्मीर दुनिया का अव्वल एजेंडा बन जाएगा. 

३. जंग अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है. मंद होती वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच दुनियाभर में भारत को तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है. क्या हम इस फायदे को खोना चाहते हैं, जिसके जरिये हम करोड़ों भारतीयों की गरीबी दूर कर सकते हैं. सिर्फ एक उन्मादी भीड़ के खून के उबाल को शांत करने के लिए, हम जंग करें, जिसे दुनिया की मौजूदा पेचीदगियों की समझ नहीं है.

गौरतलब है कि युद्ध जैसी किसी भी स्थिति से बचते हुए अगर कोई ठोस समाधान निकल पाए, जिससे हमारे उद्देश्य की भी पूर्ति हो और पाकिस्तान को गहरा आघात लगे, तो यह सही मायने में बड़ी सफलता कही जाएगी. सरकार के रवैये को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अब तक जो कुछ भी हो रहा, वह भारत के लिए सुखद है. हालाँकि चीन ने घुड़की देते हुए भारत को सावधानी बरतने की सलाह दी है. परन्तु इसे चीन का पाकिस्तान को खुला समर्थन कहना अतिश्योक्ति होगी. चीन, पाक अधिकृत कश्मीर में जारी अपने कुछ प्रोजेक्ट्स पर हुए निवेश के प्रति चिंतित अवश्य है, और उसकी इस घुड़की का आशय उसी परिपेक्ष्य में देखा जाना चाहिए. लेकिन यह भी ध्यान रहे कि चीन, भारत और पाकिस्तान के मध्य इस तनाव का इस्तेमाल खुद के फायदे के लिए कर सकता है, क्योंकि आतंकवादी देश के रूप में कुख्यात हो रहे पाकिस्तान के साथ प्रत्यक्ष रूप से खड़ा होकर वह विश्व समुदाय के मध्य अपनी छवि को भी सुरक्षित रखना चाहेगा. 

क्या है अब तक का अपडेट ?

१. भारतीय सेना ने सीमावर्ती क्षेत्रों से स्थानीय निवासियों को अपने घरों से सुरक्षित स्थान पर जाने का आह्वान कर दिया है. कल ही भारतीय सेना के मिलिट्री आपरेशन प्रमुख ने कहा है की पाकिस्तान पर कब हमला करना है और किस जगह करना है यह सेना उचित समय पर तय करेगी. 

२. उधर पाकिस्तान से खबर आ रही है की पाकिस्तानी सेना ने अपने सभी सैनिको की छुट्टियों को रद्द कर दिया है तथा पूरी थल, वायु तथा जल सेना को अलर्ट रहने का निर्देश जारी किया है. इसके साथ साथ सीमावर्ती इलाकों से सैनिको के परिवारों को जल्द से जल्द इलाका छोड़ भाग जाने का आदेश भी जारी कर दिया गया है, इसके बाद बड़े पैमाने पर सैनिको के परिवार वाले सीमावर्ती इलाके छोड़ पाकिस्तान के भीतरी इलाकों में भाग रहे है. पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय सकपकाया हुआ है और वह लगातार चीनी दूतावास के संपर्क में है.  पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय चाहता है की चीन जल्द दखल दे तथा भारत पर शांत रहने का दबाब बनाये.

३. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी अमरीकी मंत्री जॉन केरी के दरबार में पहुचे हुए है और यहाँ भारत ने सीमा पर टैंक और तोपे भेजनी शुरू कर दी है. माहौल की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि  पाकिस्तानी सेना प्रमुख राहिल शरीफ भी अपना सिंध का दौरा छोड़ इस्लामाबाद आर्मी हेड क्वार्टर में पहुच चुके है जहाँ पर उनकी बाकी सैन्य कमांडरों से मीटिंग भी चल रही है. 

४. सेना, पैरा-मिलिट्री, एयर फ़ोर्स आदि को तैयार रहने के निर्देश दे दिए गए हैं. एयर फ़ोर्स हाई अलर्ट पर है और वह तीन मिनट की नोटिस पर नियत स्थान पर कूंच कर सकते हैं. 

क्या है सकारत्मक ?

१  रूस ने पाकिस्तान के साथ आपने आर्म्स डील को निरस्त कर दिया है.

२. रूस ने पाकिस्तान के साथ अपने साझा युद्धाभ्यास के कार्यक्रम को भी रद्द करने का फैसला लिया है.

३. बंगलादेश ने भारत को हर हाल में समर्थन देने की बात कही है, उस स्थिति में भी जब कोई मिलिट्री एक्शन प्लान किया जाता है. 

४. अफ़ग़ानिस्तान और बंगलादेश ने "हर तरह के सहयोग" की बात की है, जिसमे सार्क को बायकाट करना भी शामिल है. 

५. अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति नवाज़ शरीफ के साथ  UNGA में होने वाली अपनी मीटिंग निरस्त  कर दी है.

६. फ़्रांस ने भारत को बिना शर्त सहयोग देने की बात दुहराई है. वह हर स्थिति में भारत के साथ आतंकवाद के विरोध युद्ध में साथ है. 

७. १० आतंकवादी जो भारत में घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे और पाकिस्तान की आर्मी द्वारा उन्हें कवर फायर दिया जा रहा था, उन्हें ठोक कर भारतीय सेना ने देशवासियों के जख्मों पर मलहम जरुर लगाया है. 

८. जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में भारत को आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में हर तरह के सहयोग की पेशकश की है .

९. कश्मीर में घुसपैठ की कोशिश नाकाम करते हुए सेना ने १४ आतंकवादियों को मार गिराया है. इसे बदले की पहलो क़िस्त कहा जा सकता है.

१०. अमेरिकी संसद में एक बिल प्रस्तावित हुआ है जिसमे पाकिस्तान को एक आतंकवादी देश घोषित करने की मांग की गयी है. The 'Pakistan State Sponsor of Terrorism Designation Act' (HR 6069) नाम के इस एक्ट पर राष्ट्रवपति ओबामा को इस बाबत अपनी रिपोर्ट नब्बे दिनों के भीतर सौंपना अनिवार्य है. 

लेकिन इन तमान उपलब्धियों के बावजूद एक ठोस प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा देशवासियों को है. जिन्हें मोदी पर विश्वास है, वह जानते हैं कि मोदी का सब्र बड़ा गहरा पर इतना घातक है कि बड़े-बड़े बरगद को सूखते देर नहीं लगती.  सर्वप्रथम भारत को पाकिस्तान के साथ हुई जलसन्धि को तुरंत समाप्त कर देना चाहिए.  अगर पाकिस्तान संधियों को तोड़ कर कश्मीर में दखल दे रहा तो मात्र जल संधि तोड़ने से पाकिस्तान अगले ३ महीने की भीतर ही भुखमरी की स्थिति पर होगा. 

Facebook Conversations