भारत के विषय में जितना जाना जाए, उतना कम है. दस हज़ार वर्षों की सभ्यता अपने आप में इतने रहस्यों को समेटे हुए है कि उस ज्ञान के अथाह भण्डार की परतें खोलते खोलते मनुष्य का कई जन्म बीत जाए! आपके लिए हम ऐसे कुछ रहस्यों को सामने ला रहे जिन्हें सुनकर आप भी हतप्रभ रह जायेंगे

4. ज्वाला देवी का मंदिर - जहाँ चीरकाल से जलती है ज्वाला

ज्वाला देवी का मंदिर - जहाँ चीरकाल से जलती है ज्वाला

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कालीधार पहाड़ी के बीच बसा है ज्वाला देवी का मंदिर। मां ज्वाला देवी तीर्थ स्थल को देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ माना जाता है। शक्तिपीठ वह स्थान कहलाते हैं जहां-जहां भगवान विष्णु के चक्र से कटकर माता सती के अंग गिरे थे। शास्त्रों के अनुसार ज्वाला देवी में सती की जिह्वा गिरी थी। ज्वालादेवी मंदिर में सदियों से बिना तेल बाती के प्राकृतिक रूप से नौ ज्वालाएं जल रही हैं। नौ ज्वालाओं में प्रमुख ज्वाला जो चांदी के जाला के बीच स्थित है उसे महाकाली कहते हैं। अन्य आठ ज्वालाओं के रूप में मां अन्नपूर्णा, चण्डी, हिंगलाज, विध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका एवं अंजी देवी ज्वाला देवी मंदिर में निवास करती हैं। 

ज्वाला दवी शक्तिपीठ में माता की ज्वाला के अलावा एक अन्य चमत्कार देखने को मिलता है। मंदिर के पास ही 'गोरख डिब्बी' है। यहां एक कुण्ड में पानी खौलता हुआ प्रतीत होता जबकि छूने पर कुंड का पानी ठंडा लगता है। 

5. हनुमान गढ़ी - जहाँ हनुमान जी ने भगवान् श्री राम की प्रतीक्षा की थी

हनुमान गढ़ी - जहाँ हनुमान जी ने भगवान् श्री राम की प्रतीक्षा की थी

अयोध्या नगरी में आज भी भगवान श्रीराम का राज्य चलता है. मान्यता है कि भगवान राम जब लंका जीतकर अयोध्या लौटे, तो उन्होंने अपने प्रिय भक्त हनुमान को रहने के लिए यही स्थान दिया. साथ ही यह अधिकार भी दिया कि जो भी भक्त यहां दर्शन के लिए अयोध्या आएगा, उसे पहले हनुमान का दर्शन-पूजन करना होगा.रामकाल के इस हनुमान मंदिर के निर्माण के कोई स्पष्ट साक्ष्य तो नहीं मिलते हैं. लेकिन कहते हैं कि अयोध्या न जाने कितनी बार बसी और उजड़ी, फिर भी एक स्थान हमेशा अपने मूल रूप में ही रहा. यही वह हनुमान टीला है, जो आज हनुमानगढ़ी के नाम से प्रसिद्ध है. इस टीले तक पहुंचने के लिए भक्तों को पार करना होता है 76 सीढ़ियों का सफर, जिसके बाद दर्शन होते है पवनपुत्र हनुमान की 6 इंच प्रतिमा के, जो हमेशा फूल-मालाओं से सुशोभित रहती है.

6. निधिवन - भगवान् श्री कृष्ण के रास-लीला का स्थल

निधिवन - भगवान् श्री कृष्ण के रास-लीला का स्थल

भारत में कई ऐसी जगह हैं, जो कई रहस्यमयी चमत्कारों से भरी हैं। ऐसी ही एक जगह है, वृंदावन का निधि वन। जिसके बारे में मान्यता है कि यहां आज भी हर रात श्रीकृष्ण गोपियों के साथ रास रचाते हैं। यही कारण है कि हर शाम आरती के बाद निधिवन को बंद कर दिया जाता है, उसके बाद वहां कोई नहीं रहता। यहां तक कि दिनभर निधिवन में रहने वाले पशु-पक्षी भी शाम होते ही निधिवन को छोड़कर चले जाते हैं।

जो भी देखता है रासलीला हो जाता है पागल-शाम होते ही सभी लोगों को यहां से बाहर निकाल कर निधिवन को बंद कर दिया जाता है, क्योंकि इस जगह को लेकर एक मान्यता प्रचलित है कि हर रात यहां भगवान श्रीकृष्ण आते हैं और गोपियों के साथ रास रचाते हैं। इतना ही नहीं जो भी मनुष्य रासलीला देखने की कोशिश करता है, वह या तो पागल हो जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है। यह बात जानते हुए भी कई लोगों ने निधिवन की झाडियों में छुपकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करना चाहा, परिणाम के तौर पर या तो वे अपना मानसिक संतुलन खो बैठे या उनकी मृत्यु ही हो गई।



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