हर व्यक्ति अच्छाइयों और बुराइयों से मिश्रित होता है. महाबली रावण हालाँकि अधर्म और अन्याय का प्रतिक है, लेकिन रावण से सिखने योग्य भी बहुत कुछ है. रावण महाज्ञानी तो था ही, उसके जीवन से हमें शिक्षा भी मिलती है। वह एक कुशल राजनीतिज्ञ , महापराक्रमी , अत्यन्त बलशाली , अनेकों शास्त्रों का ज्ञाता प्रकान्ड विद्वान पंडित एवं महाज्ञानी थाविचारमीमांसा आपके लिए लेकर आया है रावण की दस ख़ास बातें, जिन्हें जानकार आप भी आश्चर्य करेंगे।

1. रावण राक्षस होते हुए भी ब्रह्मा का पर-पौत्र था

रावण राक्षस होते हुए भी ब्रह्मा का पर-पौत्र था

वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण पुलस्त्य मुनि का पोता था अर्थात् उनके पुत्र विश्रवा का पुत्र था। प्रजापति पुलस्त्य,  ब्रह्मा के दस मानस पुत्रों में से एक थे.  इस प्रकार, रावण ब्रह्मा का  पर-पौत्र भी हुआ. विश्वश्रवा की वरवर्णिनी और कैकसी नामक दो पत्नियां थी. वरवर्णिनी के कुबेर को जन्म देने पर सौतिया डाहवश कैकसी ने कुबेला (अशुभ समय - कु-बेला) में गर्भ धारण किया. इसी कारण से उसके गर्भ से रावण तथा कुम्भकर्ण जैसे क्रूर स्वभाव वाले भयंकर राक्षस उत्पन्न हुए. 

2. रावण ने राम-सेतु बनने के बाद, राम के लिए यज्ञ किया था

रावण ने राम-सेतु बनने के बाद, राम के लिए यज्ञ किया था

हालाँकि यह विवादित विषय है, क्योंकि इस घटना का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में नहीं मिलता है.   लेकिन रामायण के अन्य प्रारूपों में  यह कहा गया है कि स्वयं रावण  ने भगवान् श्री राम के लिए यज्ञ में पुरोहित बनना स्वीकार किया और और उनके लिए यज्ञ कर्म कर उन्हें आशीर्वाद भी दिया था. लंका पर आक्रमण से पूर्व राम ने शिव-पूजन किया था, जिसके लिए उन्हें योग्य ब्राह्मण चाहिए था. चूँकि रावण एक महाज्ञानी ब्राह्मण था और परम शिव -भक्त भी, इसलिए इस यज्ञ के लिए वह सबसे उपयुक्त था. रावण ने यज्ञ विधि को पूरा किया और राम को आशीर्वाद भी दिया था. 

3. मृत्युशैया पर रावण ने लक्ष्मण को नीति का ज्ञान दिया था

मृत्युशैया पर रावण ने लक्ष्मण को नीति का ज्ञान दिया था

रावण महापंडित था, अतः  जब वह मृत्युशैया पर लेटा हुआ था, तब भगवान् श्रीराम ने  भ्राता लक्ष्मण  से आग्रह किया कि वह रावण से शिक्षा ग्रहण करें। युद्ध विरोधी  होते हुए भी रावण ने लक्षमण को नीति-ज्ञान दिया और कुछ महत्वपूर्ण बातें बतायीं। 

4. रावण एक कुशल विणा वादक था

रावण एक कुशल विणा वादक था

संस्कृत का महाज्ञानी और परम शिव भक्त होने के साथ,  रावण एक वीणा-वादक भी था. शिव को प्रसन्न करने हेतु उसकी स्तुति को सुन कर शिव प्रसन्न हो गए और आज भी उस स्तुति को शिव-पूजन में प्रयोग में लाया जाता है. 



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